दिल्ली में ‘सनातन चिन्हों का अपमान कहीं नहीं, कभी नहीं’ अभियान शुरू, 50 से अधिक स्थानों पर बनेंगे संग्रह केंद्र

सनातन सेवा संघ की पहल, दिल्ली सरकार के सहयोग से खंडित मूर्तियों और पुरानी पूजा सामग्री का होगा सम्मानजनक संग्रह एवं विसर्जन

नई दिल्ली-दीपावली के पावन अवसर पर सनातन सेवा संघ ने सनातन धर्म की परंपराओं, धार्मिक प्रतीकों और आस्था के सम्मान को लेकर दिल्ली में विशेष जनजागरूकता अभियान शुरू किया है। ‘जय सनातन, जय गोमाता’ के उद्घोष के साथ संगठन ने ‘सनातन चिन्हों का अपमान कहीं नहीं, कभी नहीं’ अभियान चलाने की घोषणा की है। इस पहल के तहत पूरी दिल्ली में 50 से अधिक सनातन संग्रह केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां लोग खंडित मूर्तियों, पुरानी पूजा सामग्री और धार्मिक प्रतीकों को सम्मानपूर्वक जमा करा सकेंगे।

सनातन सेवा संघ की इस पहल का उद्देश्य सड़कों, पार्कों, पेड़ों के नीचे और सार्वजनिक स्थानों पर पड़ी खंडित मूर्तियों एवं पुरानी पूजा सामग्री को एकत्रित कर उनका विधि-विधान से विसर्जन सुनिश्चित करना है। इसके लिए संगठन ने दिल्ली सरकार के साथ मिलकर संग्रह केंद्र स्थापित करने की पहल की है।

सनातन सेवा संघ के मुख्य संरक्षक कपिल खन्ना ने कहा कि सनातन धर्म का सम्मान केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमारे व्यवहार और कार्यों में भी दिखाई देना चाहिए। दीपावली का पर्व भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और माता लक्ष्मी एवं भगवान श्रीगणेश की पूजा का विशेष अवसर है। ऐसे पावन पर्व पर हमें अपनी धार्मिक परंपराओं और प्रतीकों के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

उन्होंने लोगों से अपील की कि पूजा-पाठ के बाद पुरानी और खंडित मूर्तियों को इधर-उधर सड़कों, पार्कों या पेड़ों के नीचे छोड़ने के बजाय निर्धारित संग्रह केंद्रों तक पहुंचाएं, ताकि उनका सम्मानजनक ढंग से विसर्जन किया जा सके।

पुरानी पूजा सामग्री और नए धार्मिक प्रतीकों में अंतर समझना जरूरी

संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष ललित मित्तल ने कहा कि सनातन परंपरा में समय के साथ नए और आधुनिक स्वरूपों को अपनाने की परंपरा रही है। लेकिन नई वस्तुओं को अपनाने के साथ पुरानी पूजा सामग्री और सनातन चिन्हों की पवित्रता एवं सम्मान बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने धार्मिक प्रतीकों का आदर करें और उन्हें असम्मानजनक स्थिति में न छोड़ें।

राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. अंजू जोशी ने कहा कि इस अभियान का संदेश केवल धार्मिक प्रतीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के संरक्षण से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सनातन समाज को अपनी परंपराओं के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनने की आवश्यकता है।

महामंत्री संजीव शर्मा ने बताया कि सनातन सेवा संघ इस अभियान को पूरी तरह समर्पित और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ा रहा है। दिल्ली में स्थापित होने वाले संग्रह केंद्रों पर प्राप्त मूर्तियों और धार्मिक प्रतीकों का शास्त्रोक्त विधि से विसर्जन किया जाएगा। यह अभियान केवल दीपावली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे वर्ष संचालित किया जाएगा, ताकि सनातन चिन्हों का सम्मान निरंतर सुनिश्चित हो सके।

अभियान के संयोजक विपिन अग्रवाल और सह-संयोजक अनिल गुप्ता ने बताया कि सनातन सम्मान का यह संकल्प केवल भौतिक धार्मिक प्रतीकों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से सनातन धर्म और देवी-देवताओं का अपमान करने वालों के विरुद्ध भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर विशेष शलोगन सेलर स्थापित किया जा रहा है।

**50 से अधिक संग्रह केंद्रों की सूची वेबसाइट पर उपलब्ध**

सनातन सेवा संघ ने दिल्लीवासियों से अपील की है कि वे सर्वप्रथम स्वयं शास्त्रोक्त विधि से पूर्ण सम्मान के साथ धार्मिक प्रतीकों के विसर्जन का प्रयास करें। यदि ऐसा करना संभव न हो तो उन्हें अपने नजदीकी संग्रह केंद्र पर जमा कराएं।

संगठन के अनुसार, दिल्ली में स्थापित किए जा रहे 50 से अधिक सनातन संग्रह केंद्रों की विस्तृत सूची संघ की आधिकारिक वेबसाइट www.sanatansevasangh.com**](http://www.sanatansevasangh.com) पर उपलब्ध है। नागरिक वेबसाइट के माध्यम से अपने नजदीकी संग्रह केंद्र की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

सनातन सेवा संघ की यह पहल धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सार्वजनिक स्वच्छता के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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