आईवीपी नेता मुकेश गोयल का बजट अभिभाषणः पार्षद फंड,  अधिकारियों की वित्तिय शक्तियों,पार्षद फंड,हाउस टैक्स सरीखे मुद्दों पर उठाए सवाल

इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के नेता एवं वरिष्ठ निगम पार्षद मुकेश गोयल ने दिल्ली नगर निगम के बजट पर परिचर्चा के दौरान बुधवार को कई बड़े मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल तो पार्षद फंड को 2 करोड़ किये जाने पर ही उठता है। स्टेंडिंग कमेटी चेयरमैन ने इसे 1.55 करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ करने की घोषणा की है। परंतु इसके लिये पैसा कहां से आयेगा, यह नहीं बताया है। क्योंकि पिछले वर्ष में 1.55 करोड़ में से केवल 25 लाख रूपये ही जारी किये गये हैं।
मुकेश गोयल ने कहा कि ग्रामीण संपत्तियों पर कर से छूट की सीमा 100 वर्ग मीटर से बढ़ाकर 200 वर्गमीटर की गई है। परंतु पहले 100 वर्ग मीटर तक की संपत्तियों को छूट दिये जाने के लिए वैलुएशन कमेटी से अनुमति ली गई थी, जो कि ताजा मामले में नहीं ली गई है। बजट प्रस्तावों में निगम पार्षदों के लिए सहायक के रूप में डाटा एन्ट्री ऑपरेटर दिये जाने की घोषणा की गई है। परंतु उनके वेतन के लिए बजट में कोई प्रावधान ही नहीं किया गया।

मुकेश गोयल ने कहा कि विभिन्न सरकारी संपत्तियों की ओर एमसीडी का करीब 12 हजार करोड़ रूपये बकाया है। एमसीडी बुरी तरह से आर्थिक परेशानी झेल रहा है। लेकिन वर्तमान बजट प्रस्तावों में इतनी बड़ी धनराशि की वसूली के लिए कोई कार्ययोजना नहीं बनाई गई है। बजट प्रस्तावों में कहा गया है कि एमसीडी के विभिन्न विभागों के कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जायेगा। परंतु एम.टी.एस. कर्मचारियों को पक्का करने के लिए 42 करोड़ और अन्य विभागों के दूसरे कर्मचारियों को पक्का करने के लिए 40 करोड़ रूपये एमसीडी के पास नहीं है। ऐसे में प्रस्तावित 2016-17 तक के कच्चे कर्मचारियों को पक्का किये जाने का वादा किस तरी से पूरा किया जायेगा।
स्टेंडिंग कमेटी चेयरमैन ने अपने बजट प्रस्तावों में दिल्ली में आवारा पशुओं की समस्या से छुटकारे के लिए नई गऊशालाएं बनाने का ऐलान किया है। परंतु बिना भूमि के यह गौशालाएं कैसे बनेंगीं। गौशालाओं के लिए भूमि आवंटन करने का कार्य दिल्ली सरकार करती है। पिछले 11 वर्षो से इसके लिए भूमि का आवंटन नहीं हुआ है। फिर किस तरह से नई गौशालाओं का निर्माण किया जायेगा?
मुकेश गोयल ने आगे कहा एमसीडी के सामने एक और बड़ा मुद्दा है। हाल ही में एमसीडी आयुक्त के द्वारा प्लान हेड के लिए अधिकारियों की वित्तीय शक्तियां बढ़ाई गई हैं। इस आदेश से निगम पार्षदों के द्वारा कराये जाने वालों कार्यों में कोई लाभ नहीं है। कारण है कि पार्षद फंड सहित कई तरह के फंड्स नॉन प्लान हेड के तहत आते हैं। अतः हमारी मांग है कि प्लान हेड की तरह ही नॉन प्लान हेड के तहत भी एमसीडी अधिकारियों की वित्तीय शक्तियों में बढ़ोतरी किया जाना अत्यंत आवश्यक है। इससे निगम पार्षदों के द्वारा कराये जाने वाले कामों में तेजी आयेगी और जनता से जुड़े कामों में अनावश्यक देरी कम होगी।
मुकेश गोयल ने कहा कि पहले दो-ढाई वर्षों तक आम आदमी पार्टी ने एमसीडी के जनोपयोगी कार्यों में अड़ंगा लगाया था। अब सत्ताधारी दल के द्वारा केवल खोखले दावे किये जा रहे हैं। सदन में पेश किये गये बजट प्रस्तावों में पुराने वादों की ही झड़ी लगाई गई है। परंतु इन्हें पूरा करने के लिए फंड्स की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। एमसीडी के आर्थिक दायरे को बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये हैं। ऐसे में सदन में पेश किये गये बजट प्रस्ताव केवल खोखले दावों के अलावा कुछ नहीं हैं।

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