ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को लेकर दिल्ली नगर निगम ने आयोजित की कार्यशाला

दिल्ली नगर निगम द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जन-जागरूकता को लेकर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित अधिकारियों को नए नियमों की प्रमुख विशेषताओं से अवगत कराना तथा जनप्रतिनिधियों के माध्यम से नागरिकों तक इन नियमों की जानकारी पहुंचाकर व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करना रहा।

कार्यशाला में उप महापौर डॉ. मोनिका पंत, स्थायी समिति अध्यक्ष सुश्री सत्या शर्मा, नेता सदन श्री जय भगवान यादव, स्थायी समिति उपाध्यक्ष श्री सत्य पाल सिंह, डेम्स समिति अध्यक्ष श्री संदीप कपूर, अपर आयुक्त श्री अरुण कुमार मिश्रा, जोन चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन, स्थायी समिति सदस्य, जोन अध्यक्ष , उपाध्यक्ष, स्थाई समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

इस अवसर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 पर आधारित एक “विशेष बुकलेट व स्वच्छता टी शर्ट” का भी विमोचन किया गया। बुकलेट के माध्यम से नए नियमों, कचरे के स्रोत पर पृथक्करण, कचरे के पुन: उपयोग एवं पुनर्चक्रण तथा वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को सरल रूप में प्रस्तुत किया गया है।

उप महापौर डॉ. मोनिका पंत ने कहा कि दिल्ली नगर निगम द्वारा कचरे के स्रोत पर ही पृथक्करण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि घरों, बाजारों एवं संस्थानों के स्तर पर कचरे को अलग-अलग किया जाए तो उसके संग्रहण, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ दिल्ली के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

स्थायी समिति अध्यक्ष सुश्री सत्या शर्मा ने कहा कि साफ-सफाई दिल्ली नगर निगम की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है। उन्होंने कहा कि अब नागरिकों को कूड़े को चार अलग-अलग श्रेणियों में पृथक करने की आदत अपनानी होगी। उन्होंने कहा कि स्रोत पर कचरे का उचित पृथक्करण ही शहर की स्वच्छता को सुनिश्चित करने की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। किसी भी शहर के विकास के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ स्वच्छता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री सुश्री रेखा गुप्ता द्वारा हाल ही में ‘दिल्ली को कूड़े से आज़ादी’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है और अब नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के बारे में जनता को जागरूक कर इस अभियान को और व्यापक बनाया जाएगा।

नेता सदन श्री जय भगवान यादव ने कहा कि नागरिकों को नए स्वच्छता नियमों को अपनाकर दिल्ली को स्वच्छ बनाने में अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने नागरिकों से कचरे से खाद बनाने, कचरे के पुन: उपयोग और सर्कुलर मॉडल को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कचरे को केवल समस्या के रूप में देखने के बजाय उसे उपयोगी संसाधन में परिवर्तित करने की दिशा में कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से ही दिल्ली को स्वच्छ, सुंदर और बेहतर शहर बनाने के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

स्थायी समिति उपाध्यक्ष श्री सत्यपाल सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश में स्वच्छता एक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 लागू किए गए हैं, जिनसे कचरा प्रबंधन व्यवस्था को और बेहतर एवं प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगम इन नियमों को जनता तक लेकर जाएगा और व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएगा। नए नियमों के माध्यम से कचरे के प्रबंधन को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक और आधुनिक बनाया जा सकेगा।

डेम्स समिति अध्यक्ष श्री संदीप कपूर ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जनभागीदारी को बढ़ावा देना तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के संबंध में नागरिकों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि नए नियमों में कचरे के चार भागों में पृथक्करण, कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने, पुन: उपयोग एवं पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने तथा लैंडफिल पर कचरे के दबाव को कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि नए नियमों का महत्वपूर्ण उद्देश्य सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देना है, जिसमें कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग करते हुए उसके अधिकतम पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण पर जोर दिया जाता है।

कार्यशाला में अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के विभिन्न प्रावधानों, कचरे के स्रोत पर पृथक्करण, संग्रहण एवं प्रसंस्करण की आधुनिक तकनीकों, पुनर्चक्रण, कचरे से खाद निर्माण तथा लैंडफिल पर निर्भरता कम करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

दिल्ली नगर निगम ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने घरों एवं प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को स्रोत पर ही निर्धारित श्रेणियों में अलग-अलग करें, गीले कचरे से खाद बनाने तथा सूखे और अन्य कचरे के उचित निस्तारण एवं पुनर्चक्रण में सहयोग करें। निगम ने कहा कि स्वच्छ दिल्ली का निर्माण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी और सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

दिल्ली नगर निगम का लक्ष्य है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करते हुए दिल्ली को स्वच्छ और सुंदर शहर बनाया जाए।

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