बार-बार छींक, नाक बहना और एलर्जी से परेशान हैं? आयुर्वेद में बताए गए इन उपायों पर जानिए
मौसम में बदलाव, धूल, मिट्टी, परागकण या अन्य एलर्जन्स के संपर्क में आने पर कई लोगों को बार-बार छींक आना, नाक से पानी बहना, नाक में खुजली और नाक बंद रहने जैसी परेशानी होने लगती है। इसे एलर्जिक राइनाइटिस यानी नाक की एलर्जी के लक्षणों के रूप में देखा जाता है। ऐसे लक्षण बार-बार होने पर व्यक्ति की नींद और रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं।
आयुर्वेद में नाक से संबंधित समस्याओं के लिए कुछ पारंपरिक औषधियों और नस्य उपचार का उल्लेख मिलता है। आयुष मंत्रालय के उपलब्ध दस्तावेजों में चित्रक हरितकी का उल्लेख नासा रोग, पीनस और कास आदि के संदर्भ में किया गया है।

चित्रक हरितकी और अणु तेल का प्रयोग
आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से कुछ मामलों में चित्रक हरितकी का सेवन तथा अणु तेल का नस्य प्रयोग किया जाता है।
• चित्रक हरितकी — 1-1 गोली सुबह और शाम, चिकित्सक की सलाह के अनुसार।
• अणु तेल — नाक में बूंदों के रूप में लगाया जाता है। आयुष मंत्रालय के एक दस्तावेज में अणु तेल की 1-2 बूंद प्रत्येक नासिका में सुबह-शाम लगाने का उल्लेख मिलता है।
हालांकि, किसी भी व्यक्ति के लिए दवा की मात्रा और उपचार की अवधि उसकी उम्र, स्वास्थ्य, एलर्जी के कारण और अन्य दवाओं के सेवन के आधार पर अलग हो सकती है। इसलिए चित्रक हरितकी या अणु तेल का इस्तेमाल शुरू करने से पहले योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह लेना उचित है।
एलर्जी में किन बातों का रखें ध्यान?
एलर्जी के लक्षणों को नियंत्रित करने में सबसे महत्वपूर्ण कदम संबंधित एलर्जन से बचाव है। धूल, धुआं, परागकण या जिस चीज से एलर्जी बढ़ती हो, उससे दूरी बनाने की कोशिश करें। नाक की सफाई के लिए सलाइन/नमक वाले पानी से नाक की सफाई भी कुछ लोगों में मददगार हो सकती है। (nhs.uk)
अगर छींक और नाक बहने की समस्या लगातार बनी रहती है, सांस लेने में परेशानी होती है, नींद प्रभावित हो रही है या उपचार के बावजूद लक्षण ठीक नहीं हो रहे हैं, तो डॉक्टर या एलर्जी विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। लगातार नाक बंद रहना, नाक से खून आना, दर्द या अन्य असामान्य लक्षण होने पर भी चिकित्सकीय सलाह लें।
महत्वपूर्ण: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। इसे व्यक्तिगत चिकित्सकीय परामर्श या किसी दवा के प्रिस्क्रिप्शन का विकल्प न माना जाए। आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह से ही करें।

