दिल्ली की सड़कों पर गौमाता का आशीर्वाद यूं ही बरसेगा,निगम अधिकारियों ने जताई लाचारी
संदीप शर्मा
देश की राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक जाम में अब एक और “वरदान” स्थायी रूप से सुनिश्चित हो गया है—सड़कों पर बेखौफ घूमती गौमाता।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर में हुई स्टैंडिंग् कमेटी की बैठक में MCD अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि दिल्लीवासी अब गौमाता के सान्निध्य में ही सड़क पर सफर करेंगे। निगम अधिकारियों का कहना है कि गौशालाओं में जगह खचाखच भरी हुई है, इसलिए गायों को पकड़ने की गुंजाइश फिलहाल खत्म। मतलब साफ है—हमारे हाथ खड़े हैं,गौमाता जहां चाहेंगी, वहीं विचरण करेंगी, दिल्लीवासी सिर्फ “धैर्य और श्रद्धा” से यात्रा में गाय माता का आशीर्वाद लें। अगर दुर्घटना का शिकार हों तो निगम प्रशासन को दोषी न माने और यह मान लें कि आपके भाग्य में यह लिखा होगा
बीजेपी पार्षद जगमोहन महलावत ने तो बैठक में समाधान भी दे दिया— जब तक दिल्ली में समुचित व्यवस्था न हो तब तक गायों को पड़ोसी राज्यों हरियाणा और राजस्थान शिफ्ट कर दो।” यानी दिल्ली का कचरा दिल्ली में, पर गायें पड़ोसी राज्यों में। साथ ही उन्होंने बेबस निगम में—”गायें ही नहीं, आवारा कुत्ते और बंदर की समस्याओं पर भी चिंता जताई हैं।” उन्होंने विरोध प्रदर्शन पर उतारू पशु प्रेमियों को भी कहा कि वो मुद्दे की संवेदनशीलता को समझें और जागरूक बनें ।

शायद आने वाले दिनों में दिल्ली मे देश विदेश से आने वाले टूरिस्टों को आकर्षित करने के लिए “ओपन चिड़ियाघर’ का प्रस्ताव भी आ जाए।
वहीं आम आदमी पार्टी के पार्षद प्रवीण कुमार ने बीजेपी को याद दिलाया कि दिल्ली में अब “चार-चार इंजन की सरकार” है। फिर भी भाजपा लाचार है । उनका कहना है कि बीजेपी को समस्या हल करनी नहीं, सिर्फ मंच पर भाषण और राजनीति के लिए यह एक मुद्दा मात्र है । इन गायों को बीजेपी नेता अपने घर ले जाएं ।
कुल मिलाकर नतीजा यह निकला कि—
दिल्लीवासी ट्रैफिक में फंसे-फंसे नाराज़गी न दिखाएं, बल्कि इसे “गौसेवा” मानें।
और अगर कभी अचानक मोड़ पर गाय दिख जाए, तो गौमाता की जय कहकर निकल जाएं ।

