दिल्ली नगर निगम के 550 अनुबंधित शिक्षकों के तबादले पर बवाल, मेयर से लगाई गुहार; प्रशासन बोला- बच्चों की पढ़ाई सर्वोच्च प्राथमिकता
संदीप शर्मा
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के स्कूलों में कार्यरत अनुबंधित शिक्षकों के हालिया तबादला आदेशों को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। लगभग 2,000 अनुबंधित शिक्षकों में से करीब 550 का विभिन्न निगम स्कूलों में स्थानांतरण किए जाने के बाद बड़ी संख्या में शिक्षक बुधवार को श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर स्थित निगम मुख्यालय पहुंचे और मेयर प्रवेश वाही से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
शिक्षकों का कहना है कि तबादला प्रक्रिया के दौरान न केवल उनके जोन बदल दिए गए हैं, बल्कि अधिकांश को उनके वर्तमान कार्यस्थल से 20 से 25 किलोमीटर दूर स्थित स्कूलों में भेज दिया गया है। कुछ शिक्षकों के अनुसार उन्हें इससे भी अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे रोजाना डेढ़ से दो घंटे अतिरिक्त यात्रा करनी होगी।

महापौर से शिक्षकों की मुलाकात
शिक्षकों ने मेयर को बताया कि लंबी दूरी के कारण उनके स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन और बच्चों की देखभाल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। महिला शिक्षकों ने विशेष रूप से कहा कि घर और स्कूल की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना उनके लिए और अधिक कठिन हो जाएगा। शिक्षकों की मांग है कि तबादला नीति की समीक्षा कर उन्हें राहत दी जाए।
मेयर प्रवेश वाही ने शिक्षकों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाएगा और उचित समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
प्रशासन ने बताई तबादलों की वजह
इस मामले में दिल्ली नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त संजीव मित्तल ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा किए गए तबादलों का उद्देश्य किसी शिक्षक को परेशान करना नहीं है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षकों की उपलब्धता को संतुलित करना है।

उन्होंने बताया कि नरेला और नजफगढ़ जोन में शिक्षकों की संख्या आवश्यकता से अधिक है, जबकि ट्रांस-यमुना क्षेत्र के कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए यह स्थानांतरण आवश्यक था।
अतिरिक्त आयुक्त ने कहा कि जिन शिक्षकों को स्थानांतरण आदेश जारी किए गए हैं, वे पहले अपने नए विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करें। यदि किसी शिक्षक को वास्तविक और न्यायसंगत कठिनाई है तो निगम प्रशासन उसकी शिकायत पर संवेदनशीलता से विचार करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता बच्चों की शिक्षा है और इस पर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि निगम के शिक्षकों को आवश्यकता के अनुसार किसी भी विद्यालय में सेवाएं देने के लिए तैयार रहना चाहिए। हर शिक्षक अपने घर के निकट विद्यालय में पदस्थापना चाहता है, लेकिन संसाधनों और आवश्यकता के अनुसार ऐसा हमेशा संभव नहीं होता।
भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे
इस बीच, एक अनुबंधित शिक्षक ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर आरोप लगाया कि तबादला प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं है। कुछ स्कूलों में अभी भी टीचर्स सरप्लस हैं,सिर्फ एक ज़ोन से उठाकर उन्हें दुसरे ज़ोन में भेज दिया गया है, यही नहीं शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के कारण कुछ लोग कथित रूप से राजनीतिक प्रभाव या धनबल के जरिए अपनी पसंद के स्कूलों में प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
