कमलजीत सहरावत, बाँसुरी स्वराज, राजीव बब्बर ने श्रद्धांजली पदयात्रा में शामिल सिख संगतों के साथ गुरुद्वारा श्री रकाबगंज साहिब में 1984 के शहीद सिखों की स्मृति में मोमबत्ती जगाईं

नई दिल्ली 2 नवम्बर : 1984 में 31 अक्टूबर से 2 नवम्बर के बीच कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं द्वारा करवाये सिखों के कत्लेआम के विरोध में “1984 – कांग्रेस द्वारा सिखों का नरसंहार नही भूलेगा हिन्दुस्तान” इस नारे की गूंज के साथ आज 1984 के कुछ पीड़ित परिवारों के सदस्यों ने आज सिख संगत एवं दिल्ली भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के कार्यकर्ताओं के साथ गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब से गुरुद्वारा श्री रकाबगंज साहिब तक गुरुवाणी का जाप करते हुए श्रद्धांजली पदयात्रा निकाली जिसकी व्यवस्था भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के कार्यकर्ताओं ने संभाली।

दिल्ली भाजपा सांसद श्रीमती कमलजीत सहरावत एवं सुश्री बाँसुरी स्वराज, वरिष्ठ भाजपा नेता श्री राजीव बब्बर भी 1984 नरसंहार के पीड़ित परिवारों के सदस्यों सरदार करतार सिंह, सरदारनी सुश्री प्रीति सिंह कौर, सुश्री जसवीर कौर, सुश्री भागी कौर, सुश्री परमजीत कौर, सुश्री मनप्रीत कौर आदि के साथ सैकड़ों सिख महिलाओं के जत्थे, निहंग जत्थेदारों, तिलक विहार निवासी प्रभावित सिख परिजनों की टोली और बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता भी श्रद्धांजली पदयात्रा में शामिल हुए। सभी ने गुरुद्वारा श्री रकाबगंज साहिब में नरसंहार में शहीद हुए सिखों की स्मृति में मोमबत्ती जलाईं।

दिल्ली भाजपा पदाधिकारी श्री मोहनलाल गिहारा, श्रीमती योगिता सिंह, सरदार गुरमीत सिंह सूरा, श्री कैलाश जैन, श्री अमित गुप्ता, श्री अनीश अब्बासी, सरदार चरणजीत सिंह लवली, सरदार कुलदीप सिंह, सरदार हरजिंदर सिंह सोढ़ी, सरदार सविन्दर सिंह कोहली, सरदार गुरप्रीत सिंह सरपंच, सरदार गुरमीत सिंह, सरदार कुलविंदर सिंह बंटी, सरदारनी इसप्रीत सिंह और सरदारनी कुलजीत कौर, सुश्री सुमनलता डागर आदि भी श्रद्धांजली पदयात्रा में सम्मिलित हुए।

श्रीमती कमलजीत सहरावत, सुश्री बाँसुरी स्वराज, श्री राजीव बब्बर एवं प्रदेश महामंत्री श्री मोहनलाल गिहारा ने श्रद्धांजली पदयात्रा में शामिल सिख संगतों एवं भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ गुरुद्वारा श्री रकाबगंज साहिब में 1984 के शहीद सिखों की स्मृति में मोमबत्ती जगाईं।

सांसद श्रीमती कमलजीत सहरावत ने कहा कि इंदिरा गांधी जी की हत्या के बाद 1984 में सिखों के खिलाफ हुए नरसंहार में लोगों को संगठित तरीके से निशाना बनाया गया। एक-एक घर की पहचान की गई, वहां रहने वाले सिख परिवारों को घरों से बाहर निकाला गया और उनके साथ अमानवीय अत्याचार किए गए। यह आम जनता का किया हुआ काम नहीं था, बल्कि कांग्रेस पार्टी के नेताओं और उनके समर्थित एवं संरक्षित लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया। इसका प्रमाण इस बात से भी मिलता है कि कांग्रेस ने कभी दंगा पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और उनके जख्मों पर मरहम लगाने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए।

श्रीमती सहरावत ने कहा कि आज जब राहुल गांधी एक बार फिर 1 नवंबर की तारीख के संदर्भ में ऐसी राजनीति करने का प्रयास करते हैं, तो सिख समाज के पुराने जख्म फिर हरे हो जाते हैं। सिख समाज हमेशा देश और समाज के साथ खड़ा रहा है, लेकिन अब वह अराजकता और अन्याय बर्दाश्त नहीं करेगा। आज हमारी बहनें भी राहुल गांधी से मांग कर रही हैं कि वे होश में आएं, देश में अराजकता न फैलाएं और सिख समाज के जख्मों को फिर से कुरेदने का प्रयास न करें। आपके पिता राजीव गांधी के शासनकाल में सिख परिवारों के साथ जो अन्याय हुआ और जिस तरह लोगों को भड़काने के आरोप लगे, उसकी पीड़ा आज भी समाज के मन में है। उस पीड़ा को फिर से भड़काने का प्रयास न करें, क्योंकि आज भी वे सभी पीड़ित परिवार, विशेषकर उस दौर की पीड़ा झेलने वाली हमारी बहनें, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए एकजुट हैं।

भाजपा सांसद सुश्री बांसुरी स्वराज ने कहा कि 1984 में सिख समुदाय के निर्दोष भाई-बहनों का कत्लेआम कांग्रेस की सोची-समझी साजिश थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने यह कहकर नरसंहार को जायज ठहराने की कोशिश की थी कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।आज उसी मानसिकता का परिचय उनके पुत्र राहुल गांधी ने दिया है। एक नवंबर 1984 कोकांग्रेस कार्यकर्ताओं और उनके संरक्षण में पल रहे उपद्रवियों ने सिख समुदाय के लोगों को जिंदा जला दिया था। विडंबना है कि राहुल गांधी ने उसी एक नवंबर को अराजकता की रैली निकालने का दिन चुना, जबकि सिख समुदाय वर्षों तक न्याय का इंतजार करता रहा और कांग्रेस ने चुप्पी साधे रखी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने 1984 के पीड़ित परिवारों को मुआवजा और नौकरियां देने के साथ दोषियों को सजा दिलाने का काम किया, जिसका उदाहरण सज्जन कुमार को मिली सजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की रैली में इंडिया गठबंधन के किसी भी नेता ने 1984 के सिख नरसंहार पर एक शब्द नहीं बोला। संस्कृत की कहावत ‘मौनं स्वीकृति लक्षणम्’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं की चुप्पी कांग्रेस के कृत्यों पर उनकी सहमति दर्शाती है। देश की जनता 99 बार कांग्रेस और राहुल गांधी को नकार चुकी है और कांग्रेस तथा इंडिया गठबंधन के सत्ता हथियाने के मंसूबों को भी सफल नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने रैली निकालकर सिख समुदाय के पुराने जख्मों को फिर से कुरेदा है, जिसके लिए उन्हें देश और सिख समुदाय से माफी मांगनी चाहिए तथा 1984 के नरसंहार के पीड़ितों को न्याय देना होगा।

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