राष्ट्रपति भवन की ऐतिहासिक विरासत से रूबरू हुए पूर्वोत्तर के विद्यार्थी, बढ़ा राष्ट्रीय एकता का भाव

नई दिल्ली,14 अक्टूबर 2026। भारत की सांस्कृतिक विविधता, गौरवशाली इतिहास और लोकतांत्रिक परंपराओं को समझने की दिशा में दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी महाविद्यालय के पूर्वोत्तर प्रकोष्ठ ने एक विशेष शैक्षणिक पहल की। इसके तहत पूर्वोत्तर भारत से आने वाले विद्यार्थियों ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण किया और देश की ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य कला तथा सांस्कृतिक विविधता को करीब से जानने का अवसर प्राप्त किया।

यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए केवल एक ऐतिहासिक स्थल को देखने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने उन्हें भारत की साझा विरासत और राष्ट्रीय पहचान से जुड़ने का अवसर भी प्रदान किया।

प्राचार्य ने किया शैक्षणिक भ्रमण का शुभारंभ

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर दरविंदर कुमार ने इस शैक्षणिक यात्रा का शुभारंभ किया। विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने महाविद्यालय में ऐसा वातावरण विकसित करने के महत्व को रेखांकित किया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आने वाले युवा सहजता के साथ शिक्षा प्राप्त कर सकें और अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ा सकें।

पूर्वोत्तर के विद्यार्थियों के लिए सहयोगपूर्ण और समावेशी शैक्षणिक माहौल तैयार करने में महाविद्यालय का प्रयास इस पहल के माध्यम से भी दिखाई दिया।

संग्रहालय में इतिहास, संस्कृति और कूटनीतिक संबंधों की झलक

राष्ट्रपति भवन स्थित संग्रहालय के भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने भारतीय इतिहास और कला से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण वस्तुओं को देखा। इनमें अशोक मंडप के फारसी भित्तिचित्र, ऐतिहासिक कलाकृतियां, पारंपरिक कढ़ाईदार वस्त्र और विभिन्न देशों की ओर से भेंट किए गए कूटनीतिक उपहार शामिल थे।

इन वस्तुओं के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत की सांस्कृतिक समृद्धि के साथ-साथ दुनिया के विभिन्न देशों के साथ उसके संबंधों को समझने का अवसर मिला।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने प्रसिद्ध वास्तुकार एडविन लुटियंस की स्थापत्य शैली और लुटियंस दिल्ली के विकास से संबंधित जानकारियां भी प्राप्त कीं। राष्ट्रपति भवन की भव्यता और उसकी ऐतिहासिक संरचना ने विद्यार्थियों को देश की वास्तुकला तथा विरासत के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराया।

अपने क्षेत्र से जुड़ाव ने जगाई अपनत्व की भावना

पूर्वोत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले कई विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रपति भवन की यह पहली यात्रा थी। संग्रहालय में अपने गृह राज्यों से संबंधित झलकियां देखकर उन्हें विशेष अपनत्व का अनुभव हुआ।

इस अनुभव ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि भारत की राष्ट्रीय पहचान उसकी विभिन्न क्षेत्रीय संस्कृतियों, परंपराओं और ऐतिहासिक अनुभवों से मिलकर बनती है। देश के अलग-अलग हिस्सों की विशिष्ट पहचान के बावजूद साझा विरासत सभी नागरिकों को एक सूत्र में जोड़ती है।

राष्ट्र निर्माण में योगदान के लिए प्रेरित हुए विद्यार्थी

पीजीडीएवी महाविद्यालय के पूर्वोत्तर प्रकोष्ठ की संयोजक डॉ. अनुभूति मिश्रा ने इस पहल को विद्यार्थियों में राष्ट्रीय गौरव की भावना मजबूत करने वाला अनुभव बताया। उनके अनुसार, इस तरह की शैक्षणिक गतिविधियां युवाओं को देश की विरासत से जोड़ने के साथ राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देने के लिए भी प्रेरित करती हैं।

इस अवसर पर संकाय सदस्य डॉ. अनिंदिता गोल्डर, डॉ. रेशमा तबस्सुम और सुश्री अंजलि तोमर भी विद्यार्थियों के साथ मौजूद रहीं।

पूर्वोत्तर प्रकोष्ठ की अध्यक्ष और नागालैंड की छात्रा विनिका के. चिशी ने इस यात्रा को अपने अनुभवों को समृद्ध करने वाला बताया। वहीं, मणिपुर के छात्र और प्रकोष्ठ के महासचिव लकी वारेपम ने इन यादगार पलों को अपने गृह नगर के लोगों के साथ साझा करने की इच्छा व्यक्त की।

विविधता में एकता का संदेश

राष्ट्रपति भवन का यह शैक्षणिक भ्रमण इस बात को रेखांकित करता है कि ऐतिहासिक धरोहरों से प्रत्यक्ष परिचय विद्यार्थियों के ज्ञान और दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पूर्वोत्तर के युवाओं को देश की साझा विरासत से जोड़ने वाली ऐसी पहलें आपसी समझ, सांस्कृतिक संवाद और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने का अवसर प्रदान करती हैं।

भारत की शक्ति उसकी विविध भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और क्षेत्रीय पहचानों में निहित है। इन विविधताओं को समझना और उनका सम्मान करना ही एक सशक्त, समावेशी तथा एकजुट राष्ट्र की आधारशिला है।

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