नवरात्र,दिवाली और शादी सीजन पर प्रदर्शनों का साया? चांदनी चौक के व्यापारियों ने राजनीतिक दलों से लगाई गुहार
नई दिल्ली। दिल्ली में लगातार हो रहे राजनीतिक प्रदर्शनों और सुरक्षा के मद्देनजर सार्वजनिक परिवहन पर लगाई जा रही पाबंदियों के बीच व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। नवरात्र , दिवाली, शादी-ब्याह और पर्यटन के लिहाज से अक्टूबर 2026 से जनवरी 2027 तक की अवधि राजधानी के कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन ऐसे समय में बाजारों तक पहुंचने में परेशानी, ट्रैफिक जाम और मेट्रो-रेल सेवाओं में व्यवधान व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित करते नज़र आ रहे हैं। इसी चिंता को लेकर चांदनी चौक ट्रेडर्स परिषद ने सभी राजनीतिक दलों से आंदोलन की राजनीति से बचने और व्यापारिक गतिविधियों को बाधित नहीं करने की अपील की है।

परिषद की ओर से व्यापारी नेताओं सुरेश बिंदल और देवराज बवेजा ने कहा कि त्योहारों और विवाह समारोहों के सीजन में बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ती है। दिल्ली के बाजारों में स्थानीय खरीदारों के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और देश के अन्य हिस्सों से भी बड़ी संख्या में व्यापारी तथा ग्राहक खरीदारी के लिए आते हैं। यदि उन्हें दिल्ली पहुंचने, बाजारों तक आने-जाने या सामान की ढुलाई में परेशानी होती है, तो इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ सकता है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से बढ़ी चिंता
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन के नेता भी विरोध दर्ज करा चुके हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य संगठनों की ओर से भी प्रदर्शन की घोषणा की गई है।
AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रदर्शन में अपने परिवार के साथ शामिल होने की बात कही है। वहीं, राहुल गांधी और कांग्रेस सहित विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर पहले भी विरोध दर्ज कराया है। विपक्ष की ओर से मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।
दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। ऐसे में व्यापारियों का कहना है कि राजनीतिक दलों को अपने विरोध-प्रदर्शनों के दौरान आम जनता और कारोबारियों की परेशानियों का भी ध्यान रखना चाहिए।
57 मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां, इंटरनेट सेवा भी प्रभावित
10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था के तहत दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित करने तथा ट्रेन सेवाओं के संचालन में बदलाव की व्यवस्था की गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ये प्रतिबंध 9 अक्टूबर की रात से लागू किए जाने थे।
इसके अलावा, प्रदर्शन स्थल के आसपास चार किलोमीटर के दायरे में 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने की घोषणा की गई। रेलवे ने भी सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर कुछ ट्रेनों को रद्द करने की जानकारी दी है।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन इनके कारण यात्रियों, कर्मचारियों, कारोबारियों और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। खासकर उन लोगों को परेशानी हो सकती है जो दिल्ली के बाजारों में खरीदारी या व्यापार के सिलसिले में आते हैं।
चांदनी चौक के बाजारों पर क्यों पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर?
दिल्ली का चांदनी चौक देश के प्रमुख थोक और खुदरा व्यापारिक केंद्रों में शामिल है। यहां कपड़े, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू सामान, शादी-ब्याह से जुड़ी वस्तुओं और अनेक अन्य उत्पादों का कारोबार होता है। त्योहारों के समय दिल्ली-एनसीआर के साथ दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में ग्राहक और व्यापारी यहां खरीदारी करने पहुंचते हैं।
व्यापारियों की चिंता है कि यदि मध्य दिल्ली में ट्रैफिक जाम, मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां और आवागमन संबंधी अनिश्चितता बनी रहती है, तो ग्राहक बाजार आने का कार्यक्रम टाल सकते हैं। थोक कारोबारियों को माल की डिलीवरी में परेशानी हो सकती है और छोटे दुकानदारों की बिक्री भी प्रभावित हो सकती है।
इसका असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहता। बाजारों में काम करने वाले कर्मचारी, रेहड़ी-पटरी वाले, रिक्शा चालक, माल ढोने वाले श्रमिक, डिलीवरी कर्मी और चाय-खाने की दुकानों से जुड़े लोगों की आजीविका भी बाजारों की गतिविधियों पर निर्भर करती है।
व्यापारियों की चिंता: नुकसान केवल दुकानदारों का नहीं
चांदनी चौक ट्रेडर्स परिषद की अपील ऐसे समय आई है, जब अन्य व्यापारिक संगठनों ने भी प्रदर्शनों और यातायात संबंधी बाधाओं के कारण कारोबार प्रभावित होने की चिंता जताई है।
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने भी त्योहारों के दौरान प्रमुख बाजारों और व्यस्त कारोबारी इलाकों में बड़े प्रदर्शनों को लेकर चिंता जताई है। CTI ने अपने आकलन के आधार पर दिल्ली के बाजारों में पिछले दिनों कारोबार और ग्राहकों की आवाजाही में गिरावट का दावा किया है। यह संगठन का आकलन है; इसे दिल्ली के सभी बाजारों के स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़े के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
व्यापारियों का तर्क है कि त्योहारों के सीजन में पहले से ही माल की खरीद, कर्मचारियों के वेतन, दुकानों के किराये और अन्य खर्चों पर बड़ी रकम लगाई जाती है। ऐसे में यदि ग्राहकों की संख्या घटती है, तो कारोबारियों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है। लगातार कई दिनों तक व्यापार प्रभावित होने पर छोटे कारोबारियों और दिहाड़ी पर निर्भर लोगों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।
राजनीतिक विरोध का अधिकार अपनी जगह, आम जनता की सुविधा भी जरूरी
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची और अन्य सार्वजनिक मुद्दों पर राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। दूसरी ओर, विरोध-प्रदर्शनों के दौरान आम नागरिकों की आवाजाही, सार्वजनिक परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों को लेकर भी संतुलित व्यवस्था जरूरी है।
व्यापारियों की अपील है कि राजनीतिक दल अपने कार्यक्रमों की योजना बनाते समय त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन को ध्यान में रखें। प्रदर्शन स्थलों का चयन, ट्रैफिक प्रबंधन और बाजारों तक पहुंच बनाए रखने के लिए प्रशासन के साथ समन्वय किया जाना चाहिए, ताकि विरोध दर्ज कराने के साथ-साथ सामान्य जनजीवन भी चलता रहे।
जनवरी तक का सीजन व्यापारियों के लिए अहम
अक्टूबर से जनवरी तक त्योहारों, विवाह समारोहों, पर्यटन और साल के अंत की खरीदारी के कारण अनेक कारोबारी क्षेत्रों में मांग बढ़ती है। दिल्ली के बाजारों के लिए यह अवधि विशेष महत्व रखती है। ऐसे में व्यापारियों को आशंका है कि यदि राजनीतिक गतिविधियों के कारण बार-बार आवागमन बाधित होता है, तो दिल्ली के बाजारों में आने वाले ग्राहकों की संख्या प्रभावित हो सकती है।
चांदनी चौक ट्रेडर्स परिषद की अपील का मुख्य संदेश यही है कि राजनीतिक दल अपने मुद्दे उठाएं, लेकिन व्यापारियों की आजीविका और आम जनता की सुविधा को भी प्राथमिकता दें। व्यापारियों के अनुसार, बाजारों में सामान्य गतिविधियां जारी रहना केवल दुकानदारों के हित में नहीं, बल्कि रोजगार, छोटे कारोबार और राजधानी की आर्थिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

