कर वसूली में गिरफ्तारी प्रावधान की समाप्ति प्रधानमंत्री मोदी के विश्वास-आधारित सुशासन के नए युग की शुरुआत : प्रवीण खंडेलवाल
चाँदनी चौक से सांसद एवं कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने आयकर नियम, 2026 के नियम 225 से गिरफ्तारी एवं निरुद्ध (डिटेंशन) संबंधी प्रावधानों को हटाने के केंद्र सरकार एवं केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के निर्णय का स्वागत किया है। यह संशोधन 17 सितंबर को अधिसूचित किया गया था। इसके तहत कर बकाया की वसूली के लिए गिरफ्तारी एवं सिविल कारावास को निर्धारित प्रक्रिया से हटाकर संपत्ति आधारित वसूली एवं अन्य नागरिक उपायों पर बल दिया गया है।

श्री खंडेलवाल ने कहा, “देश के व्यापारी, एमएसएमई, उद्यमी और करदाता राष्ट्र निर्माण के प्रमुख भागीदार हैं। कर अनुपालन आवश्यक है, लेकिन वसूली की प्रक्रिया भी न्यायसंगत, पारदर्शी और मानवीय गरिमा का सम्मान करने वाली होनी चाहिए। कर वसूली ढांचे से गिरफ्तारी संबंधी प्रावधानों को हटाना भय-आधारित प्रशासन से विश्वास-आधारित प्रशासन की ओर एक निर्णायक बदलाव है। इससे ईमानदार करदाताओं का विश्वास मजबूत होगा और स्वैच्छिक कर अनुपालन की भावना को नई शक्ति मिलेगी।”
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री मोदी ने अनावश्यक अनुपालन बोझ को कम करने, छोटे आर्थिक अपराधों के अपराधीकरण को समाप्त करने, कर प्रक्रियाओं को सरल बनाने, फेसलेस असेसमेंट जैसी व्यवस्थाओं को लागू करने तथा करदाता-अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार कार्य किया है। यह संशोधन उसी परिवर्तनकारी यात्रा का एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
श्री खंडेलवाल ने कहा कि अनेक बार व्यापारी और छोटे व्यवसायी प्रक्रियागत, तकनीकी अथवा अपीलाधीन मामलों में भी कठोर वसूली प्रावधानों के कारण मानसिक दबाव और असुरक्षा का अनुभव करते थे। कर वसूली की निर्धारित प्रक्रिया से गिरफ्तारी के प्रावधान को हटाकर सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि आर्थिक विकास और कर अनुपालन, भय या दबाव से नहीं बल्कि करदाताओं के साथ साझेदारी और विश्वास से सुनिश्चित किए जा सकते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संशोधन से सरकार की वैध कर देयताओं की वसूली की क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि संपत्तियों की कुर्की एवं बिक्री सहित अन्य वैधानिक वसूली उपाय यथावत उपलब्ध रहेंगे। बल्कि यह सुनिश्चित करेगा कि वसूली की कार्रवाई संतुलित, नागरिक प्रकृति की तथा एक आधुनिक और विकसित भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप हो।
श्री खंडेलवाल ने कहा, “देश भर के व्यापारिक समुदाय की ओर से मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण तथा सीबीडीटी को इस साहसिक और दूरदर्शी निर्णय के लिए बधाई देता हूँ। यह सुधार करदाताओं और सरकार के बीच विश्वास को और मजबूत करेगा, उद्यमिता को प्रोत्साहित करेगा, व्यापारिक विश्वास बढ़ाएगा तथा विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस निर्णय का देश भर के व्यापारी, एमएसएमई, पेशेवर वर्ग और करदाता व्यापक रूप से स्वागत करेंगे तथा इससे भारत की छवि एक व्यापार-अनुकूल, करदाता-अनुकूल और नागरिक-केंद्रित अर्थव्यवस्था के रूप में और अधिक सुदृढ़ होगी।

