दिल्ली के सभी 357 गांवों में मिशन मोड पर लागू हो स्वामित्व योजना : प्रेम प्रकाश शौकीन

स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड वितरण की घोषणा का स्वागत, समयबद्ध क्रियान्वयन की मांग

सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनहित याचिकाकर्ता प्रेम प्रकाश शौकीन ने दिल्ली सरकार द्वारा स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड जारी करने तथा केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व (SVAMITVA) योजना को लागू करने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा है कि अब इस योजना को केवल घोषणाओं तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर प्रभावी और समयबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई स्वामित्व योजना ग्रामीण आबादी क्षेत्रों के निवासियों को संपत्ति का स्पष्ट रिकॉर्ड, कानूनी सुरक्षा तथा स्वामित्व का अधिकार प्रदान करने वाली एक ऐतिहासिक और जनकल्याणकारी पहल है। यह योजना लाखों ग्रामीण परिवारों को संपत्ति संबंधी विवादों से मुक्ति दिलाने और उनके अधिकारों को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

प्रेम प्रकाश शौकीन ने बताया कि स्वामित्व योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि दिल्ली के 357 गांवों में से अब तक केवल 37 गांवों में ही योजना का कार्य प्रारंभ हो पाया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति चिंता का विषय है और योजना के लाभों को प्रत्येक पात्र नागरिक तक पहुंचाने के लिए कार्यों में तेजी लाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से योजना की वर्तमान स्थिति, प्रगति तथा सभी गांवों में इसके क्रियान्वयन की समय-सीमा संबंधी विस्तृत रिपोर्ट और शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि योजना को दिल्ली के सभी गांवों तक पहुंचाने के लिए क्या ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है।

शौकीन ने आशा व्यक्त की कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार स्वामित्व योजना को मिशन मोड में लागू करते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी 357 गांवों में इसका विस्तार सुनिश्चित करेगी। उन्होंने मांग की कि प्रत्येक पात्र निवासी को जल्द से जल्द स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड उपलब्ध कराया जाए ताकि उन्हें कानूनी रूप से सुरक्षित संपत्ति अधिकार प्राप्त हो सकें।

उन्होंने कहा कि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन न केवल ग्रामीण नागरिकों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि संपत्ति संबंधी विवादों को कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने तथा ग्रामीण विकास को नई गति देने में भी सहायक सिद्ध होगा। यह कदम जनहित, सुशासन और ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।

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